
औरंगाबाद कस्बा औरंगाबाद में आवारा कुत्तों और बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को बाहर निकलने में कठिनाई हो रही है। वार्ड नंबर 11 में गली से गुजरने पर कुत्तों द्वारा भौंकने और हमले की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही है स्थानीय लोगों ने नगर पंचायत से निजात पाने की लगाई गुहार
आवारा कुत्तों और बंदर का आतंक बढ़ा, लोगो में दहशत
नगर के कई इलाकों में आवारा कुत्तों और बंदरों का आतंक दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। मोहल्लों से लेकर मुख्य सड़कों तक कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते नजर आते हैं। इससे राहगीरो, खासकर बच्चो, बुजुर्गों और महिलाओं का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। हर दिन किसी न किसी को काटने या डराने की घटनाएं सामने आ रही हैं। शहर के वार्ड संख्या 11=13 के लोगो ने बताया कि कुत्तो और बंदरों का झुंड सुबह-सुबह और देर शाम के समय ज्यादा सक्रिय रहता है। स्कूल जाने वाले बच्चों को अक्सर डरकर रास्ता बदलना पड़ता है। वहीं, बुजुर्गों को मंदिर जाने या घूमने निकलने में अब डर लगता है। वार्ड नंबर 11से नगर पंचायत सभासद का चुनाव लड़े पिंटू ठाकुर ने बताया के नगर के बिजलीघर पर बंदरों का झुंड अचानक लोगो पर हमला करके सामान छीन कर ले जाते है और गली में घूमने वाले आवारा कुत्तों के द्वारा काटने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही है आए दिन ऐसी घटनाएं हो रही हैं जिनमें कई लोग चोटिल हो चुके है। स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने कई बार नगर पंचायत में शिकायत दर्ज करवाई है, लेकिन कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। न तो नसबंदी अभियान चलाया जा रहा है, न ही कुत्तों और बंदरों को पकड़ने की कोई ठोस व्यवस्था है। लोगों का कहना है कि नगर पंचायत की उदासीनता के चलते अब यह समस्या गंभीर रूप धारण कर चुकी है। लोगो ने अविलंब कुत्तों और बंदरों की नसबंदी का अभियान चलाने, एक हेल्पलाइन नंबर जारी करने, जिस पर तत्काल कुत्ते और बंदरों को पकड़ने की सूचना दी जा सके, रेस्क्यू टीम गठित कर सक्रिय निगरानी रखने, शेल्टर होम और पुनर्वास की व्यवस्था की जाए ताकि कुत्ते और बंदरों को मानव संपर्क से दूर रहे। अगर समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो यह समस्या किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वह तुरंत इस दिशा में गंभीरता से कार्रवाई करे। क्षेत्र के बच्चे, बूढ़े, युवा जंगली बंदर के आतंक से लोग भयाक्रांत हे बंदर कभी किसी के छत पर तो कभी पानी के टंकी पर चढ़ कर तो कभी किसी के आंगन में आकर उपद्रव मचाते हे छत पर सुख रहे कपड़ों को फाड़ देते हैं। जिसके कारण लोग अपने घर में दुबके रहने पर मजबूर हैं। मोहल्ले के पिंटू ठाकुर,रवि वर्मा,वकील खान, जीतू गोस्वामी, मुदित, वासुदेव शर्मा सहित अन्य ने बताया कि सुबह से ही वह लोग बंदर के आतंक से परेशान रहते है।लोगो ने वन विभाग से रेस्क्यू कर इन जानवरों से निजात पाने की मांग की है।