औरंगाबाद छेत्र के गांव पावसरा निवासी प्रगतिशील किसान ओमकार सिंह चौहान ने फसली खेती में नुकसान होने पर अपने खेत से मिट्टी उठवाकर सिंघाड़े की खेती करने का फैसला किया और अच्छा मुनाफा कमाया है। ओमकार सिंह चौहान ने बताया कि सिंघाड़ा एक जलीय पौधा है, जिसकी खेती तालाब या पानी भरी जमीन में की जा सकती है। यह फसल कम जोखिम वाली और अधिक मुनाफे वाली मानी जाती है।
सिंघाड़े की खेती के फायदे कम लागत सिंघाड़े की खेती में लागत कम आती है, खासकर जब इसे तालाब में उगाया जाता है, जहां सिंचाई और खाद की आवश्यकता नहीं होती।
सिंघाड़े की फसल से अच्छा मुनाफा होता है, खासकर जब इसे सही समय पर बाजार में बेचा जाए। किसान ने बताया कि सिंघाड़े की खेती में जोखिम कम होता है, क्योंकि यह फसल पानी में उगाई जाती है और सूखे की स्थिति में भी सुरक्षित रहती है।
ओमकार ने बताया कि सिंघाड़े की नर्सरी जनवरी से फरवरी के महीने में तैयार की जाती है। किसान ने बताया कि इसकी सिंघाड़े के पौधे की बुवाई जून-जुलाई के महीने में तालाब या खेतों में की जाती है।
फसल चक्र सिंघाड़े की फसल के बाद, दलहन और तिलहन फसलों की भी खेती की जा सकती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और आय भी बढ़ती है।
ओमकार सिंह चौहान ने बताया कि कई प्रगतिशील किसानों ने सिंघाड़े की खेती करके अपने जीवन में सुधार किया है और अब वे अच्छी आय कमा रहे हैं ।
