औरंगाबाद एक ओर नगर पंचायत प्रशासन प्रदूषण नियंत्रण के लिए तमाम दावे कर रही है तो दूसरी ओर या तो नगर पंचायत के कर्मचारी या आम नागरिक कूड़े में आग लगाकर वायु प्रदूषण करने में लगे हैं। यही नहीं नगर में कई जगह पानी की टंकियां खुली छोड़ी जाने से पेयजल की बर्बादी हो रही है।
औरंगाबाद नगर में पेयजल व सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी नगर पंचायत की है। जल संरक्षण व वायु प्रदूषण पर नियंत्रण का जिम्मा भी उसी का है। औरंगाबाद नगर पंचायत की ओर से नियुक्त सफाई कर्मचारी पूरे नगर से कचरा एकत्र कर एक नियत स्थान पर डाल देते हैं। इस व्यवस्था में कुछ कर्मचारी अपनी मनमानी के चलते नागरिकों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। नगर पंचायत के कर्मचारी कूड़े को नगर के खाजपुर गांव के पास डंपिंग ग्राउंड में या मार्ग किनारे पर डाला जा रहा है। यहां मवेशियों के झुंड कूड़े को फैला देते हैं। इससे यहां रहने वाले लोगों के लिए कूडे़ की बदबू से जीना मुहाल हो रहा है। रास्ते से गुजरने वाले बच्चों व ग्रामीणों के लिए भी आना-जाना दूभर हो रहा है। इसी कूडे़ के ढेर में कुछ कर्मचारी एकत्र की गई पन्नी आदि में आग लगा देते हैं। इससे यहां बदबू के साथ भारी प्रदूषण भी फैल रहा है। नागरिकों की मानें तो कुछ कर्मचारी या आम आदमी जहांगीराबाद रोड पर रोजाना कूड़े में आग लगा देते हैं। इससे धुआं और बदबू फैली रहती है। इसकी वजह से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। सरकारी टंकियों के दिनभर खुले रहने से पेय जल की भी बर्बादी हो रही है। आपको बता दे की कुछ दिन पहले ही व्यापारी सुरक्षा फोरम के नगर अध्यक्ष शिवकुमार गुप्ता के नेतृत्व में नगर पंचायत की उदासीनता नालों में कूड़ा कचरा फैला रहने पर एक ज्ञापन नगर पंचायत अध्यक्ष के पिता को भी व्यापारियों ने सौंपा था फिर भी व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो पा रही या फिर नगर पंचायत अपने कर्तव्य पर ध्यान नहीं दे रही है और फिर लापरवाही बरत रही है
इस संबंध में नगर पंचायत के ईओ सेवाराम राजभर का कहना है कि वह खुद निरीक्षण कर व्यवस्था दुरुस्त कराएंगे। और जो भी व्यक्ति कूड़े मैं आग लगाकर प्रदूषण को बढ़ावा दे रहा है ऐसे व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।