औरंगाबाद (बुलंदशहर)।
कस्बा औरंगाबाद की कमान संभालते ही नवागत चौकी इंचार्ज आदेश कुमार ने अपनी कार्यशैली के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। पदभार ग्रहण करने के बाद आयोजित पहली पत्रकार वार्ता में उन्होंने बेहद सख्त और दो-टूक लहजे में कहा कि कस्बे में कानून का राज होगा, किसी ‘रसूख’ या ‘गुंडागर्दी’ का नहीं।
”जुर्म किया तो खैर नहीं”:
पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने अपराधियों को खुली चुनौती देते हुए कहा, “मेरा उद्देश्य केवल ड्यूटी करना नहीं, बल्कि जनता के मन से भय को खत्म करना है। जो लोग गलत गतिविधियों में लिप्त हैं, वे समझ लें—या तो अपराध छोड़ दें या कस्बा, वरना सलाखें उनका इंतजार कर रही हैं।” उन्होंने साफ किया कि अवैध धंधों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।
जनता के लिए ‘मित्र पुलिस’ का संकल्प:
एक तरफ जहाँ अपराधियों के लिए उनके तेवर सख्त थे, वहीं आम जनता के लिए वे उतने ही नरम नजर आए। उन्होंने क्षेत्रीय नागरिकों से सीधा संवाद करते हुए भावुक अपील की— “चौकी आपकी है और मैं आपकी सेवा के लिए यहाँ हूँ। यदि किसी को भी कोई सता रहा है या कोई परेशानी है, तो दलालों के चक्कर काटने के बजाय सीधे मुझसे आकर मिलें। आपकी पहचान गुप्त रखी जाएगी और समस्या का समाधान प्राथमिकता पर होगा।”
सुरक्षा का नया रोडमैप:
नवागत इंचार्ज ने बताया कि कस्बे के मुख्य चौराहों और संवेदनशील इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ाई जाएगी। रात्रि चेकिंग अभियान में तेजी लाई जाएगी ताकि आम आदमी चैन की नींद सो सके। उनके इस बेबाक और जनहितैषी रवैये की कस्बे में खूब चर्चा हो रही है।
औरंगाबाद में ‘सिंघम’ अवतार: नवागत चौकी इंचार्ज आदेश कुमार के कड़े तेवरपहली प्रेस वार्ता में हुंकार: “अपराधी या तो जुर्म का रास्ता छोड़ें, या औरंगाबाद की सीमा”